प्रेरक तथ्य

एक शिक्षक जो शिक्षण से प्यार करता है वो अपने छात्रों को ज्ञान से प्यार करना सिखाता है.

अपने छात्रों में सृजनात्मक भाव और ज्ञान का आनंद जगाना ही एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण गुण है.

हम में से अधिकांश लोगों को सिर्फ पांच से छ: व्यक्ति तक ही याद रख पाते हैं लेकिन एक शिक्षक को हजारों व्यक्ति जीवन पर्यंत याद रखते हैं.

अगर आप सीखना नहीं चाहते तो कोई भी आपकी सहयता नहीं कर सकता.अगर आप सीखने के लिए दृढ संकल्प हैं तो कोई भी आपको रोक नहीं सकता.

एक अच्छा शिक्षक आपको आपके प्रश्नों के उत्तर नहीं देता बल्कि वो सिर्फ आपको रास्ता दिखाता है और आपको आपका चुनाव खुद करने देता है ताकि आप वो सब खुशियाँ प्राप्त कर सकें जिनके आप योग्य हैं.

एक अच्छे शिक्षक की परीक्षा यह नहीं है कि वो अपने छात्रों से कितने प्रश्न पूछ सकता है जिसके कि आसानी से उत्तर दे सकें.बल्कि इसमें है कि वो अपने छात्रों को कितने प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करता है जिसका उत्तर देना उसके लिए मुश्किल हो.

शिक्षक और शिक्षा

शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली

महर्षि अरविंद ने शिक्षकों के सम्बन्ध में कहा है कि ''शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते हैं।' 'महर्षि अरविंद का मानना था कि किसी राष्ट्र के वास्तविक निर्माता उस देश के शिक्षक होते हैं।


समाज के वास्तविक शिल्पकार होते हैं शिक्षक

शिल्पकार एवं कुम्हार की भाँति ही स्कूलों एवं उसके शिक्षकों का यह प्रथम दायित्व एवं कर्त्तव्य है कि वह अपने यहाँ अध्ययनरत् सभी बच्चों को इस प्रकार से संवारे और सजाये कि उनके द्वारा शिक्षित किये गये सभी बच्चे 'विश्व का प्रकाश' बनकर सारे विश्व को अपनी रोशनी से प्रकाशित कर सकें।

बालक के जीवन को सफल बनाने की आधारशिला हमें बचपन में ही रखनी चाहिए

एक कुशल इंजीनियर वहीं होता है जो एक भव्य इमारत या भवन के निर्माण में उसकी नींव को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हुए उसे मजबूत बनाता है। ठीक इसी प्रकार से हमें बच्चों के बारे में भी सोचना चाहिए क्योंकि आज के बच्चे ही कल अपने परिवार, समाज, देश तथा विश्व के भविष्य निर्माता बनेंगे।

प्रत्येक बालक को विश्व का प्रकाश बनायें

शिक्षक एक सुन्दर, सुसभ्य एवं शांतिपूर्ण राष्ट्र व विश्व के निर्माता हैं। शिक्षकों को संसार के सारे बच्चों को एक सुन्दर एवं सुरक्षित भविष्य देने के लिए व सारे विश्व में एकता एवं शांति की स्थापना के लिए बच्चों के कोमल मन-मस्तिष्क में भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता के रूप में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' व 'भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51' के विचार रूपी बीज बचपन से ही बोने चाहिए।

समाज में व्याप्त बुराईयों को समाप्त करती है उद्देश्यपूर्ण शिक्षा

डॉ. राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमत्तापूर्ण व्याख्याओं, आनंदमयी अभिव्यक्ति और हँसाने, गुदगुदाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को प्रेरित करने के साथ ही साथ उन्हें अच्छा मार्गदर्शन भी दिया करते थे। उनकी मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाए तो समाज की अनेक बुराइयों को मिटाया जा सकता है।

शिक्षकों के श्रेष्ठ मार्गदर्शन द्वारा ही धरती पर ईश्वरीय सभ्यता की स्थापना संभव

भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक गुणों से ओतप्रोत शिक्षकों के द्वारा ही समाज में व्याप्त बुराईयों को समाप्त करके एक सुन्दर, सभ्य एवं सुसंस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है। डा0 राधाकृष्णन भी ऐसे ही महान शिक्षक थे जिन्होंने अपने मन, वचन और कर्म के द्वारा सारे समाज को बदलने की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की।