हमारे बारे में महत्वपूर्ण बिंदु


नमस्कार विद्वान साथियों

1 जुलाई 2013 को लागू किये गए वित्त विभाग के वेतनमान ने वरिष्ठ अध्यापकों के दिमाग में भूचाल ला दिया जब सभी कर्मचारियों का परिवीक्षाकाल में नियत स्थाई वेतन में वृद्धि की गयी तब भी वरिष्ठ अध्यापकों का नियत स्थाई वेतन 11100₹ ही रख दिया । तब प्रमुख शासन सचिव वित्त से मुलाकात कर उनको पूरा मामला समझया तो स्थाई वेतन 11100₹ से बढाकर 13050 ₹ कर दिया लेकिन 2 वर्ष के बाद स्थाईकरण 16290₹ को बजाय 14430₹ ही रख दिया , तब वरिष्ठ अध्यापकों के होश फाख्ता हो गए हर माह 4 हजार रूपये कम दिए जा रहे है इसी हक की लडाई के लिए वरिष्ठ अध्यापकों ने राष्ट्रिय माध्यमिक शिक्षा अभियान की ट्रेनिंग में एकजुट होकर अपना पहला प्रदर्शन CM हॉउस 13 जनवरी 2014 था ।
लोकसभा चुनाव एकदम सिर पर आ चुके थे किसी प्रकार का जोखिम टारगेट 25 से दूर कर सकता था । इसलिए दिन भर CM हाउस में दिनभर रुकने के बाद श्री राजेंद्र राठौर साहब ने यह वेतन विसंगति 60 दिन की कार्य योगं में शामिल कर दूर करने का ठोस आश्वासन दिया । लेकिन आज 600 दिन भी गुजर गए कोई नतीजा नही हुआ ।
लोकसभा चुनाव के बाद लगातार जन प्रतिनिधियों, मंत्रियों, विधयाकों, वित्त विभाग के अधिकारियों से मिलकर इस वेतन विसंगति को दूर करने की तरफ ध्यान आकृष्ट किया लेकिन आश्वासन के सिवाय किसी ने कुछ नहीं किया ।
फिर कुछ जाबाज वरिष्टअध्यापकों ने आंदोलन को सोशिल मिडिया से लगातार जारी रखा ।
26अक्टूबर 2014 को सभी जिलों से सक्रिय साथियों को बुलाकर सिविल लाइन जयपुर पर मीटिंग की गई और मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया । और पंचायत चुनाव से पहले एक बड़े आंदोलन की रुपरेखा तय की गई ।
सभी 33 जिलों के जिला प्रभारी नियुक्त करके "राजस्थान राज्य द्वितीय श्रेणी कर्मचारी संघर्ष समिति" का गठन करके सभी जिलों मेंनवम्बर माह में  जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया ।

16 नवंबर 2014  को बीकानेर दौरे पर शिक्षामंत्री जी को ज्ञापन दिया तो उन्होंने भी ठोस आश्वसन को भुला दिया ||

6 नवंबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक जी परनामी जी से मिलकर CM से मुलाक़ात करवाने की बात कहि तब उन्होंने CM और मुख्य सचिव वित् को पत्र लिखकर वेतन विसंगति जल्द दूर करने का पूरा आश्वासन दिया जिस पर अमन नही हो पाया अभी तक ||

उसके बाद वरिष्ठ अध्यापकों ने निर्णय लिया की  आंदोलन करेंगे तभी सरकार की नींद खुलेगी और 
1 दिसंबर 2014 को उद्योग मैदान में पूर्व राजस्थान से आये हुए 4 हजार वरिष्ठ अध्यापकों ने दिनभर भर जमकर  प्रदर्शन किया ।  और 2 महीने में वेतन विसंगति दूर नही करने पर विधान सभा का घैराव की चेतावनी दी ||
इन सभी गतिविधियों और सभी शिक्षक संगठन दूर रहे और हम सभी नवनियुक्त वरिष्ट अध्यापक अकेले पड़ गए ।
सभी संघो से वेतन विसंगति पर आग्रह किया ।
लेकिन उन्होंने गम्भीरता से नहीं लिया ।
तो हम सब ने मिलकर अपनी ताकत के आधार पर आपका अपना संगठन खड़ा किया गया ।


फिर 28 दिसंबर को संघ गठन की प्रारम्भिक बैठक की गई और संघ की राज्य कार्यकारिणी का  गठन  करके 29 व 30 दिसम्बर 2014 को संघ का पंजीकरण करवाया गया ताकि प्रत्येक वरिष्ठ अध्यापकों के हितो की रक्षा की जा सके व शिक्षा व शिक्षार्थी की समस्याओं पर चर्चा कर सके ||

जनवरी 2015 में पंचायती राज चुनाव में अपना पूरा सहयोग व कर्तव्यनिष्ठा से वरिष्ठ अध्यापकों ने राज धर्म निभाया ||


इसके बाद 16 फरवरी 2015 को संघ की बैठक करके 10 मार्च को विधान सभा घेराव की रणनीति तय की गई और 10 मार्च को विधानसभा का घेराव किया गया ।

सादुलपुर विधायक श्री मनोज जी न्यांगली जी ने सदन के पटल पर भी वेतन विसंगति की तरफ मुख्यमंत्री सहित पुरे सदन का ध्यान आकृष्ट किया इसके बावजूद कोई कार्यवाही अमल में नही लायी गयी यानी सरकार की मंशा में खोट साफ़ नज़र आई || 
इसके बावजूद हमने लोकतान्त्रिक सरकार पर विश्वास बनाये रखा और एक बार और मई में शिक्षा संकुल पर क्रमिक धरने देने पर 20 अप्रैल --2015 को  मई में आंदोलन की रुपरेखा तय की और इससे पहले एक साथ 6 मई को 33 जिला मुख्यालयों पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन फिर 12 मई को एक साथ उपखण्ड मुख्यालय पर ज्ञापन दिया गया ।
21 मई से क्रमिक आंदोलन के लिए आवेदन किया ।
सरकार की तानाशाही ने एन वक्त पर अनुमति रद्द कर दी फिर भी जाबाज 250 से 300  साथियों ने 21 मई को संकुल पर धरना दिया ।
21 मई को तय किया गया की अब तानाशाही सरकार के विरुद्ध कोर्ट की शरण ली जाये ।
सभी उपस्थित साथियों की एक राय से रणनीति बनाई गई ।
हमारे कुछ साथियों ने 22और 23 मई को वित्त विभाग और मुख्य सचिव मंत्रियो को ज्ञापन भी दिया ।
तय किया गया 500 कोर्ट शुल्क की रसीद छपवाई गई ।
इसके बाद भी कोर्ट शुल्क के लिए ग्रीष्म कालीन प्रशिक्षण में भी हम गए थे ।
पूरे ग्रीष्म कालीन अवकाश में हम वकीलों के ऑफिस और कैम्प में घूमते रहे ।
सभी ने मिलकर तय किया दो वकील विज्ञानं शाह और रमनदीप खरलिया।
लेकिन पैसे का अभाव और समय के फेर का इंतजार किया ।
इतने में सभी शिक्षक 
फिर समय वृद्धि के लिए  सरकार के साथ लड़ाई के लिए सयुक्त मोर्चे का गठन हुआ ।
हमे आमन्त्रण मिला ।
हमने स्वीकार किया और हमारी मांग समय वृद्धि से वेतन विसंगति महत्व्पूर्ण बताकर 16290 की मांग जुड़वाइ और हर समय सयुक्त मोर्चे के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े ।
इतिहास के बड़े आंदोलनों में से एक आंदोलन 22 जुलाई को हुआ ।
पर तानाशाही सरकार ने आंदोलन को कुचल दिया ।
फिर भी सयुक्त मोर्च उठ खड़ा हुआ और 9 अगस्त से आरपार की लड़ाई का आगाज किया हमने पूर्ण तन मन धन से सहयोग किया ।
सरकार की तानाशाही के आगे फिर मोर्चा विफल रहा ।
और हमारे अरमान एक बार फिर विफल हुए ।
हमने कोर्ट के लिए जुलाई में विज्ञानं शाह के यहाँ केस फाइल कर दिया था ।
हमे सरकार से कुछ आशा थी की सयुक्त मोर्चे की मुख्य मांगो में हमारी मांग पर सरकार कुछ निर्णय हमारे पक्ष में ले ले तो कोर्ट नहीं जाना पड़े ।
लेकिन सयुक्त मोर्चा महत्वाकाक्षी का शिकार हुआ और आंदोलन विफल हो गया ।
हमने सितम्बर प्रारम्भ में जोधपुर कोर्ट में भी केस लगा दिया ।
अब उनकी सुनवाई पर हमारी उम्मीदे है